IJC# 353 Mystery of Sunken Treasure in English and Hindi

 
Hi everyone, We have today special treat for you. IJC 353 in two languages. This is a nice story about a sunken ship having a treasure on board. Coast guard is guarding it day and night. Two crooks hatch a plot to steal the treasure which also involves Diana Palmer. Do they succeed? Read on ...

Originaly it was daily strip 72 - The Underwater Diamond Thieves (3 Nov 1958~7 Mar 1959)

Written by Lee Falk
Artist: Wilson McCoy

Scanned by: IUnknown
Edited by: Prabhat.
Hoping you'll like this comics.




सभी इंद्रजाल कॉमिक्स के दीवानों को IUknown का नमस्कार. आज हम लाए  है, इंद्रजाल कॉमिक्स संख्या ३५३ का  दो भाषाओं में प्रस्तुस्तीकरण.

इसमे एक डूबे जहाज पर स्थित खजाने की लूट की कहानी है| दो चोर डकैती की अनूठी योजना बनाते है, तटरक्षक दल के नाक के नीचे|  इसके लिए वो डायना को एक झूठी कहानी बताकर अपनी योजनामें  शामिल कर लेते हैं|  क्या वो सफल होते है? आगे पढ़िए...

इसका स्कैनिंग मैंने किया है और संपादन का कम प्रभात का है. आशा है आपको पसंद आयेगा |


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English Version (38.45 MB)
  
Hindi Version    (39.24 MB)


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Hindi Version    (16.37 MB)
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इंद्रजाल कॉमिक्स संक्या २२८: तुलसीकृत "रामचरित मानस" भाग २: उत्तरार्ध


बंधुओं आज प्रस्तुत है, अनुराग भाई के अद्वितीय हिंदी इंद्रजाल संग्रह से  हिन्दी साहित्य की एक महानतम रचना का कॉमिक रूपांतरण: 

इस कॉमिक की खाशियत यह है कि इसमें मूल ग्रंथ की चौपाइयों या उसके अंशों के साथ समकालीन हिंदी भाषांतर भी है|   

रामचरितमानस अधिनायकों  और उनके बलिदानों की कहानी है| यह वर्णों के विभिन्न प्रकार और उनके व्यवहार, रवैया, संचार और नेतृत्व  की अलग शैली की कहानी है| वैसे तो माना जाता है यह मुख्यतः उत्तर भारत के हिन्दुओं के घर- घर पाया जानेवाला धर्म ग्रंथ है, लेकिन जो नीति और मर्यादा पुरुषोतम का उदाहरण इसमें दी गयी है, वो धर्म, प्रदेशों और देशों  की सीमाओं से बहुत ऊपर है|

रामचरितमानस शब्द "राम", "चरित" (चरित्र) और "मानस" (सरोवर) शब्दों के मेल से बना है अर्थात् "राम के चरित्र का सरोवर"।रामचरितमानस को सामान्यतः 'तुलसी रामायण' या 'तुलसी कृत रामायण' भी कहा जाता है| इस महाग्रंथ के रचियता गोस्वामी तुलसीदास जी (1532 -1623) ने  बालकाण्ड में स्वयं लिखा है कि उन्होंने रामचरितमानस की रचना का आरंभ अयोध्यापुरी में विक्रम संवत् 1631 (1574 AD) के रामनवमी (मंगलवार) को किया था| गीताप्रेस गोरखपुर के श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार के अनुसार रामचरितमानस को लिखने में गोस्वामी तुलसीदास जी को दो वर्ष सात माह एवं छब्बीस दिन का समय लगा था और संवत् 1633 (1576 AD) के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में रामविवाह के दिन उसे पूर्ण किया था|  

रामचरित मानस की रचना उस समय की अवधी भाषा में की गई थी जो कि हिंदी की ही एक शाखा है| ।  मानस में संस्कृत, फारसी और उर्दू के शब्दों की भरमार है। तुलसीदास ने अवधी और ब्रज भाषा के मिले-जुले स्वरूप को प्रचलित किया। तुलसीदास ने संज्ञाओं का प्रयोग क्रिया के रूप में किया तथा क्रियाओं का प्रयोग संज्ञा के रूप में। इस प्रकार के प्रयोगों के उदाहरण बिरले ही मिलते हैं। तुलसीदास ने भाषा को नया स्वरूप दिया।

अपने दीर्घ जीवन-काल में तुलसीदास जी ने कुल 22 कृतियों की रचना की है जिनमें से पाँच बड़ी एवं छः मध्यम श्रेणी में आती हैं। रामचरितमानस के बाद हनुमान चालीसा, जो कि हिन्दुओं की दैनिक प्रार्थना कही जाती है, तुलसीदास जी की अत्यन्त लोकप्रिय साहित्य रचना है। 

रामचरितमानस निम्नलिखित सात "काण्डों" में विभक्त हैः
१.बालकाण्ड (१-३६१)
२.अयोध्या काण्ड (१-३२६)
पहले दो काण्डों पर कॉमिक्स का पहला भाग आधारित था, यह भाग बाकी पाँच काण्डों पर  आधारित है| 
 
३.अरण्य काण्ड (१-४६)
४.किष्किन्धा काण्ड (१-३०)
५.सुन्दर काण्ड (१-६०)
६.लंका काण्ड (१-१२१)
७.उत्तर कांड (१-१३१)

संशोधन के पहले 
इस महाकाव्य पे जितना भी लिखा जाय कम है, विशिष्ठ पहलुओं पे फिर  कभी History and Mythology ब्लॉग पे हम आगे बढ़ेंगे|  

तुलसीकृत  "रामचरित मानस" भाग २: उत्तरार्ध
संचयन: नरेन्द्र शर्मा
चित्रकार: रवि परांजेप
कुल  पृष्ठ: ९३
स्कैन योगदानकर्ता: अनुराग दीक्षित
 
अगर आप इसे पढ़ना चाहते हैं तो डाउनलोड करने के लिए लिंक यहाँ नीचे उपलब्ध है:
संशोधन  के बाद 
 
१६०० पिक्सेल- ४९.४७ MB
                 या
२००० पिक्सेल - १०९.५ MB


 तनिक स्कैन संशोधन में मेरा भी  प्रयास शामिल है| मिसाल की तौर पे पेश है, मात्र दो पृष्टों में से एक पृष्ट जिसका एक भाग क्षतिग्रस्त था| मुख्य पृष्ठ पे मामूली सी मरम्मत और बाकि सभी चमकदार बनाने की कोशिश की है, जो शायद और भी अच्छी हो सकती थी|


उम्मीद है आप सभी निराश ना होंगे|


चलते चलते कुछ अनमोल शब्द रामचरित मानस से ही: 

सचिव बैद गुरु तीनि जौं,
प्रिय बोलहिं भय आस
राज, धर्म,तन तीनि कर,
होई बेगहिं नास
अर्थात: मंत्री, बैद्य और गुरु ये तीन यदि अप्रसन्नता के भय या लाभ की आशा में प्रिय शब्द कहते हैं, यानि वास्तविकता को छिपाते हैं, वैसे राज्य, शरीर और धर्म इन तीनों का नाश निश्चित है|
 ~ सुन्दरकांड


खल सन कलह न भल नहिं प्रीति
अर्थात: अशांति के साथ ना कलह अच्छा, ना ही प्रेम अच्छा |  
~ उत्तरकांड

दुष्टों के बारे में:


झूठलेना झूठदेना झूठ भोजन झूठ चबेना
बोलहिं मधुर बचन जिमी मोरा खाई महा अहि ह्रदय कठोर


अर्थात: उनका झूठा ही लेना और झूठा ही देना होता है । झूठा ही भोजन होता है और झूठा ही चबेना होता है| यानि लेन - देन के व्यवहार में झूठ का आश्रय लेकर दूसरों का हक़ मारते हैं और खुद फायदा  उठाकर  मदद करने का ढोंग करते हैं|  जैसे मोर बहुत मीठा बोलता है, परन्तु  ह्रदय  कठोर होता है। वैसे ही दुष्ट भी ऊपर से मीठे बचन बोलते हैं, परन्तु ह्रदय के बड़े निर्दयी होते हैं ।


अवगुन सिन्धु मंदमति कामी बेद बिदूषक परधन स्वामी
बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा दंभ कपट जिय धरे सुबेषा


अर्थात: वे अवगुणों के समुद्र , मंदबुद्धि कामी और पराये धन को लूटने वाले होते हैं । वे दूसरों से द्रोह रखते हैं। उनके ह्रदय में कपट और दंभ भरा होता है परन्तु वे सुन्दर वेश धारण किये रहते हैं|



मैं अपनी दिसी किन्ही निहोरा तिन्ह निज ओर लाउब भोरा
बायस पली अहिं अति अनुरागा होहिं निरामिष कबहूँ कि कागा


अर्थात: मैंने अपनी ओर से विनती भी की है , परन्तु वे अपनी ओर से कभी नहीं चुकेंगे। कौवों को कितना भी प्रेम से पालिए परन्तु क्या कभी मांस खाना त्याग सकते हैं|
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3 IJC (1974): 197 - To Each his Own, 203 - Treasure from No Man's Land & 206 - Operation JIG-3


India got its independence from the clutches of British rule on 15th August 1947, after a great political and social struggle.

All of us can move around freely and sleep fearlessly because our soldiers are at the frontiers guarding us from the enemies. They are the brave sons of India with a deep respect and love for their motherland.

Away from family and friends, they live in inhospitable conditions, yet their commitment never wavers.

Whenever enemies have been attacked, our soldiers have shown great valor and determination. These resolute soldiers are ever ready to do their duty unto death without hesitation. We are protected and secure because of them.

These 3 Indrajal are dedicated to the brave soldiers of India.



Note: These are cover to cover new high resolution scans (2000 px width). All thanks and credits go to Venkitachalam Subramanian who scanned, edited & uploaded specially for this occasion. 




Hoping you'll enjoy!
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142 (1971) The Evil Ones

 Here comes 3rd Mandrake vintage comics in a row: 
This story was first published as the Daily Strips #138 -  The Evil Ones ( 26-Aug-1968 ~ 07-Dec-1968)

Script: Lee Falk
Artist: Fred Fredericks

Download 66.24 MB C2C version (2000 px width)

Scanned, edited & uploaded by Venkitachalam Subramanian. All thanks & credits go to him.
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132 (1972) The Eccentric Count (or The Missing Celebrities)

Here comes another comic which cover contains title "The Eccentric Count" and inside story's title is "The Missing Celebrities". 

In fact, it's the Daily strips #140 - The Connoisseur 
(24 March 1969 to 12 July1969)

Script: Lee Falk
Artist: Fred Fredericks

Don't know why such twists in titles.

However, it's a nice story. Enjoy!

Download 66.24 MB C2C version (2000 px width)

Scanned, edited & uploaded by Venkitachalam Subramanian. All thanks & credits go to him.
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128 (1970) The Criminal Team

It's Daily strips # 127 -  The Team (04-Jan-1965 ~  01-May-1965)
Script: Lee Falk
Artist: Fred Fredericks

As  Venkitachalam is scanning all IJC available with him, today enjoy one more vintage Indrajal.

Download   67.81 MB (2000+ px width)

Scanned & edited by Venkitachalam Subramanian.   All thanks & credits go to him.

P.S.: One more C2C version by IUnknown is available here.
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130 (1971) The Night of the Theft

This story was first printed as the Daily Strips #100 - Jungle Olympics (Rex and the Trophy Thieves)
Newspaper run: 22 Jan 1968 - 4 May 1968

The strory: An Olympic year in the jungle and as always  the mighty Phantom Trophy is attracting unwanted attention. This time from gangsters in league with ex-convict Oban, nephew of the Oogan king.

Not only priceless gems with the trophy are in the danger, but the Rex's life & the peace in the jungle are also on card.

Could the Phantom save these incidents? Obviously yes, however Barry's art and Falk's script made this story much interesting. This HR C2C version scanned and edited by Venkitachalam Subramanian, might make happier to HR scans lovers.

Enjoy!


DOWNLOAD COMICS  - 73.63 MB
(2100 px width  C2C version)

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30 (1966) The Girls

This Indrajal contains two comics along with some more 1 -2 pages comics:
1. Track Hunter: The Legend of the Diamond Crocodile (4 pages)

2. The girl (19 pages)- It was first printed  as the Sunday strips #13 -The Strange Fisherman (01-Jul-1945 ~ 02-Dec-1945)
Writer: Falk
Artist: McCoy    

This story starts after the dramatic events in the golden village (read S012 The Golden Princess or  IJC #18 ). On return the Phantom and Diana are surprised to see new visitors as the Marshall Sisters  in the Deep Woods. To enter in Deep Woods, they have introduced themselves as the wives of the jungle ruler and have been accepted as such by the Bandar.

We know that the first Sunday strip in Indrajal Comics was S#12. To know more about the Marshall Sisters, read S008 - S010. All refereed strips are available HERE.

Needless to say this creates immediate friction, and after some explosive situations, Diana decides that she must leave the Deep Woods forever. However, this is just the beginning of the Phantom’s problems, as Diana and the sisters soon become unwilling victims of a highland prince Simitar’s 'fishing' expedition.........


Read yourself, here is comic:

2000px width (45.95 MB):          Image and video hosting by TinyPic 

1600px width (18.78 MB):           Image and video hosting by TinyPic  

Note: 1600px wide file is specially reduced in size, keeping relatively higher resolution. In future, I'll try to give 2 links whenever cleaned & upload for myself or others members. All suggestions for further improvement are most welcome.


This vintage comics is scanned &  edited by Anurag Dixit from own collection. Since a long we were searching cover to cover version.  That's why, I just tried improving.  Could be improved better, however, hoping you would find  good enough for reading.
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V21N29 & V21N30 -1984-Phantom-The Ancient Cave of Splendor Part I & II


Hi All,
We have special treat for you today.  Phatom's Ancient Cave of Splendour  and Rip kirby's Victims of Vendetta .
Phatom's story is one of my favourites. Some crooks decide to rob the Skull cave of its treasure and make a daring plan for the same.Plan is very good. Do they succed? Read on. When I read about the description of treasures in Skull cave I really wish such a cave existed.
Rip kirby's story is also good, Rip was always my favourite although not as famous as Phantom or Mandrake. Enjoy the stories and the weekend.


High resolution:


Part 1 : Image and video hosting by TinyPic


Part 2:  Image and video hosting by TinyPic




1600px wide files:

Part 1 : Image and video hosting by TinyPic


Part 2:  Image and video hosting by TinyPic


All credits go
Scanning: IUnknown
Editing: Prabhat
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138 (1971) The Trail of Death (or The Famous Friendship)

It's a story about the first meeting of Mandrake & his best friend Lothar, the strongest man in the world.

Lothar is of Old German origin, and the meaning of Lothar is "famous warrior".

Probably Mandrake term was picked by Falk from the plant  Mandragora officinarum (The mandrake). The (European) Mandrake plant has been used since ancient times as a medicinal plant and has a tradition associated with magical activities. According to the legend, when the root is dug up it screams and kills all who hear it. Same concept is used  in "Harry Potter series" by  J. K. Rowling. However only Falk could answer correctly.

Logically I guess, if wrong pls correct me, it's the Sunday strips #101 -  The Meeting of Mandrake and Lothar (30 Apr 1967- 24 Sep 1967)
Reason:  Under the artist Fred Fredericks  (born Aug. 9, 1929, in Atlantic City, N.J.) who took over in 1965 (after original artist Phil Davis had died), Lothar was rebranded; he began to speak correct English, and slowly his clothing changed from shirts with leopard-skin patterns. After death of Lee Falk (April 28, 1911 - March 13, 1999), Fred took over writing the strip in addition to providing sketches for it. This indrajal was printed  in 1971, none other strips title matches between this interval 1965-1971, I'm missing  many strips along with S#101, so can't check.

Although Lothar made his first appearance alongside Mandrake in 1934 in the inaugural daily strip, he was little more than Mandrake's servant. He spoke poor English, wore a fez, short pants and a leopard skin. His muscles far exceeded his mental abilities.

Mandrake first met Lothar during his travels in Africa. Lothar was then "Prince of the twelve Nations", a mighty federation of jungle tribes. He passed on the chance to become king and followed Mandrake on his world travels (and the rest of the universe as well), fighting crime and villains.


Hoping you'll like this comics.

Image and video hosting by TinyPic

All credits go to Venkitachalam Subramanian who scanned, edited & uploaded himself.
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117 (1970) The Iron Monster



 It's the Daily Strips #80-The Iron Dragon (27-Feb-1961 to 13-May-1961)

Script: Lee Falk
Artist: Wilson McCoy

Summary: The jungle tribes are defenceless against the impregnable metal tank, but news is spreading fast to the Deep Woods. Why the tribes were attacked with the tank? Can the keeper of the jungle peace in time stop, Read yourself in this coloured Indrajal.

Hoping you'll like this comics.
Image and video hosting by TinyPic 
Scanned and edited by Venkitachalam Subramanian. All credits go to him.

As we all know, Mrs Subramanian is undergoing surgery on Aug 4th in USA. All our best wishes for her quickest recovery.
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111(1970) Ming The Merciless

Here is one more vintage coimc.

Pencils / Inks: Pat Boyette

Reprinted from Flash Gordon 18 (01/1970) (Charlton) which is available at Books & Comics: HERE

It contains 3 stories:
Story 1: Scourge of the Locust Men! - 15 pages
Story 2: The  Great Battles of History: Shiraz! - 4 pages
Story 3: Time Waits for All Men - 7 pages

 Image and video hosting by TinyPic   


Scanned & edited by Venkitachalam Subramanian.   All credits go tohim.
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